ICSE Class 10 Hindi • Sahitya Sagar (Stories) • Chapter 2
पाठ का परिचय (Introduction):
'काकी' श्री सियारामशरण गुप्त द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण और बाल-मनोविज्ञान पर आधारित कहानी है। यह कहानी एक छोटे से अबोध बालक श्यामू की है, जिसने अपनी माँ (काकी) को खो दिया है। कहानी दर्शाती है कि बच्चों का हृदय कितना कोमल और निश्छल होता है। वे मृत्यु के कठोर सत्य को नहीं समझ पाते और अपनी कल्पनाओं में प्रियजनों को वापस पाने के मार्ग खोजते हैं।
कहानी की शुरुआत में श्यामू उठता है तो देखता है कि घर में कोहराम मचा है। उसकी माँ (काकी) ज़मीन पर लेटी हैं और ऊपर से कपड़ा ओढ़ा हुआ है। लोग उन्हें अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगते हैं। श्यामू को बताया गया था कि उसकी काकी मामा के यहाँ गई है, लेकिन बाद में बच्चों से उसे पता चलता है कि काकी तो राम के यहाँ गई है (स्वर्ग)।
श्यामू अपनी काकी के लिए बहुत रोता है और उसे वापस लाना चाहता है। वह आसमान में उड़ती पतंगों को देखकर एक योजना बनाता है। वह सोचता है कि यदि वह एक पतंग राम के यहाँ भेजे, तो काकी उसे पकड़कर नीचे आ जाएगी। इस योजना के लिए उसे पैसों की ज़रूरत थी। उसने अपने दुखी पिता विश्वेश्वर से पैसे माँगे, लेकिन जब उन्होंने ध्यान नहीं दिया, तो उसने उनके कोट की जेब से एक चवन्नी चुरा ली।
चवन्नी से उसने अपने साथी 'भोला' के माध्यम से एक पतंग और डोर मँगवाई। श्यामू ने भोला से एक मोटी रस्सी लाने को कहा क्योंकि उसे डर था कि पतंग की सूत वाली डोरी टूट सकती है। रस्सी के लिए उसने फिर से पिता के कोट से एक रुपया चुराया।
उसने जवाहर भैया से पतंग पर 'काकी' लिखवाया ताकि पतंग सीधे उसकी माँ के पास पहुँचे। जब दोनों बच्चे पतंग में रस्सी बाँध रहे थे, तभी क्रोधित विश्वेश्वर वहाँ आ गए। उन्होंने भोला को डाँटा, तो भोला ने डरकर बता दिया कि श्यामू ने रस्सी के लिए पैसे चुराए थे।
विश्वेश्वर ने श्यामू को बुरी तरह पीटा और उसकी पतंग फाड़ दी। लेकिन जब उन्होंने फटी हुई पतंग पर लिखा 'काकी' शब्द पढ़ा, तो वे सन्न रह गए। उन्हें अहसास हुआ कि श्यामू ने चोरी किसी बुरे इरादे से नहीं, बल्कि अपनी मृत माँ को वापस बुलाने के अपने मासूम प्रेम के कारण की थी।
प्रसंग: जब काकी की मृत्यु हुई, तो घर के बड़ों ने श्यामू को बताया कि काकी मामा के यहाँ गई है ताकि वह परेशान न हो। लेकिन बच्चों ने उसे सच बता दिया।
व्याख्या: यह बच्चों की मासूमियत और उनकी दुनिया की सच्चाई को दर्शाता है जहाँ वे झूठ छिपा नहीं सकते और बातों को सीधे-सीधे कह देते हैं। 'राम के यहाँ' का अर्थ स्वर्ग जाना है।
प्रसंग: यह कहानी का अंतिम और सबसे भावुक दृश्य है जब विश्वेश्वर ने श्यामू की पतंग फाड़ दी थी।
व्याख्या: यह शब्द ('काकी') विश्वेश्वर के क्रोध को शांत कर देता है। उन्हें अपने बेटे के निश्छल मातृ-प्रेम और अपनी स्वयं की क्रूरता पर पश्चाताप होता है। यह एक शब्द पूरी कहानी की आत्मा है जो श्यामू की तड़प को व्यक्त करता है।
प्रश्न 1: श्यामू ने पिता के कोट की जेब से पैसे क्यों चुराए?
उत्तर: श्यामू को पता चल गया था कि उसकी काकी (माँ) राम के यहाँ (स्वर्ग) चली गई है। उसने तय किया कि वह पतंग उड़ाकर काकी को नीचे बुलाएगा। पतंग और बाद में एक मोटी रस्सी मंगवाने के लिए उसे पैसों की आवश्यकता थी। पिता उदास रहते थे, इसलिए उसने पहले एक चवन्नी और बाद में एक रुपया अपने पिता के कोट से चुराया।
प्रश्न 2: भोला ने श्यामू को रस्सी मँगवाने की सलाह क्यों दी?
उत्तर: जब श्यामू पतंग में डोर बाँधने की बात कर रहा था, तब भोला ने कहा कि पतंग की सूत की डोर बहुत पतली है। काकी इसे पकड़कर नीचे आएगी तो डोर टूट सकती है। इसलिए भोला ने सलाह दी कि एक मोटी रस्सी मँगवा ली जाए ताकि काकी सुरक्षित नीचे आ सके।
प्रश्न 3: विश्वेश्वर 'ह्तबुद्धि' होकर क्यों खड़े रह गए?
उत्तर: जब विश्वेश्वर को पता चला कि श्यामू ने पैसे चुराए हैं, तो उन्होंने क्रोध में श्यामू को पीटा और उसकी पतंग फाड़ दी। परंतु जब उन्होंने फटी हुई पतंग का कागज़ देखा जिस पर 'काकी' लिखा था, तो वे दंग रह गए (ह्तबुद्धि)। उन्हें समझ आ गया कि श्यामू ने चोरी काकी को भगवान के पास से वापस बुलाने के लिए की थी। उन्हें अपने किए पर पछतावा हुआ।